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शिवभक्तों की आस्था का प्राचीन केंद्र है शाहपुर जंगल धाम

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हर सोमवार उमड़ते हैं श्रद्धालु, आदि गंगा गोमती में स्नान के बाद बाबा गौरीशंकर का करते हैं जलाभिषेक

अरूण दुबे

चांदा, सुलतानपुर। चांदा क्षेत्र का प्रसिद्ध श्री गौरी शंकर शिव धाम शाहपुर जंगल शिवभक्ति की आस्था का प्राचीन केंद्र है। यहां पर सावन ही नहीं, प्रत्येक सोमवार को भारी संख्या में श्रद्धालुओं की भक्ति उमड.ती है। सावन के अंतिम सोमवार को जौनपुर, प्रतापगढ़, अंबेडकरनगर समेत दूर-दराज के क्षेत्रों से श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया।

आदि गंगा गोमती में स्नान के बाद भक्तों ने बाबा गौरी शंकर का जलाभिषेक कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। मंदिर परिसर दिनभर हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष से गूंजता रहा।


यह धाम केवल सावन के सोमवार तक सीमित नहीं है। वर्षभर प्रत्येक सोमवार को यहां श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है। स्थानीय लोगों के मुताबिक दूर-दराज से आने वाले भक्त बाबा गौरी शंकर के दर्शन और जलाभिषेक को विशेष आस्था से जोड़कर देखते हैं। सावन, महाशिवरात्रि और अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ जाती है।

मंदिर के पुजारी संतराज गोस्वामी ने बताया कि मंदिर में सुबह से ही पूजा-अर्चना शुरू हो जाती है और देर तक भक्तों का आना-जाना लगा रहता है। श्रद्धालु गंगाजल, दूध, बेलपत्र, फूल और प्रसाद चढ़ाकर भगवान शिव का आशीर्वाद लेते हैं। सावन के अंतिम सोमवार पर देर शाम तक मंदिर में दर्शन-पूजन का सिलसिला चलता रहा। धाम की प्राचीनता, गोमती तट और श्रद्धालुओं की अटूट आस्था इसे क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में विशेष स्थान दिलाती है।

डेढ़ सौ वर्ष पुराना माना जाता है मंदिर

ग्रामीणों के अनुसार मंदिर में स्थापित शिवलिंग करीब डेढ़ सौ वर्ष पुराना और स्वयंभू माना जाता है। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि सच्चे मन से बाबा गौरी शंकर की आराधना करने पर मनोकामना पूरी होती है। यही विश्वास इस प्राचीन धाम को आसपास के जिलों के श्रद्धालुओं के बीच विशेष पहचान दिलाता है।

गोमती स्नान के बाद पहुंचते हैं भक्त

धाम की एक विशेषता आदि गंगा गोमती का समीप से गुजरना भी है। अनेक श्रद्धालु पहले नदी में स्नान करते हैं और इसके बाद मंदिर पहुंचकर जलाभिषेक करते हैं। अंतिम सोमवार पर भी नदी किनारे और मंदिर परिसर में भक्ति का अद्भुत वातावरण रहा।

शिवभक्त रवींद्र प्रताप सिंह ने कहा, शाहपुर जंगल धाम की महिमा दूर-दूर तक है। हर सोमवार श्रद्धालु यहां पहुंचकर बाबा गौरी शंकर का पूजन करते हैं। राजेश सिंह ने कहा, यह प्राचीन मंदिर क्षेत्र की आस्था का प्रमुख केंद्र है। दूर के गांवों से लोग सोमवार को दर्शन-पूजन के लिए यहां आते हैं। बृजलाल पाल ने कहा, सावन में भीड़ अधिक रहती है, लेकिन सालभर हर सोमवार भक्तों का आना-जाना लगा रहता है। यहां की आस्था अलग है। पुजारी संतराज गोस्वामी ने कहा, भक्त श्रद्धा से जलाभिषेक और पूजा करते हैं। बाबा गौरी शंकर के प्रति लोगों की आस्था पीढ़ियों से चली आ रही है।

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